उर्वशी दत्त बाली बताती हैं कि जब वह हर सुबह अपनी बेटी को स्कूल छोड़ने जिप्सी से निकलती हैं, तो रास्ते में एक अमरूद के पेड़ की झुकी हुई टहनी और उस पर लगे फल सीधे उनकी जिप्सी के विंडस्क्रीन से टकराते हैं। साइकोलॉजी (मनोविज्ञान) के अनुसार, जब भी कोई चीज़ तेज़ी से सामने आती है, तो हमारा दिमाग़ हमें सुरक्षित रखने के लिए तुरंत ‘रिफ्लेक्स एक्शन’ (स्वाभाविक बचाव) देता है। वें कहती हैं कि वो डरकर अपना चेहरा थोड़ा नीचे कर लेती थीं,मानो वह फल सीधे उनके चेहरे पर लग जाएगा। स्वतंत्रता दिवस के आगमन अवसर पर उर्वशी दत्त बाली को एक बहुत बड़ी सीख मिली,,, उन्होंने गौर किया कि जिप्सी का शीशा एक मजबूत ढाल बनकर हर चोट खुद सह लेता है और उन तक कोई खरोंच नहीं आने देता।इसी अनुभव को देश की आजादी और सुरक्षा से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि
जिस तरह मेरी गाड़ी का शीशा मुझे हर टकराते फल और टहनी से सुरक्षित रखता है, ठीक उसी तरह हमारे देश की सीमाओं पर तैनात हमारे वीर सैनिक देश के लिए अदृश्य और अटूट ढाल हैं। वे हर मौसम, हर मुश्किल और हर खतरे को अपने सीने पर सहते हैं ताकि हम सब अपने घरों में आजादी की सांस ले सकें और सुरक्षित मुस्कुरा सकें।
स्वतंत्रता दिवस पर वीर जवानों को बधाई संदेश देते हुएउर्वशी दत्त बाली भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना और सभी सीमा सुरक्षा बलों के वीरों को कोटि-कोटि नमन करते हुए और स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देती हैं और कहती है किआप हैं, तो हमारी सुरक्षा है। आप सीमा पर डटे हैं, तभी हमारा भारत मुस्कुरा रहा है। श्रीमती बाली अपनी शुभकामनाओं के साथ-साथ पूरे देश की जनता की तरफ से देश के रक्षक जवानों को सलाम करती है और कहती है कि हमें गर्व है अपने उन सुरक्षा सैनिकों पर जो दिन-रात हमारी सुरक्षा की खातिर खुद जागकर रात बिताते हैं।
जय हिंद! जय भारत!

संपादक – सच्चाई की जीत
पता – Nafees Screen Printers, Near Bilal Masjid, Ward no. 10, Ali Khan, Kashipur 244713
संपर्क – 9837427792
व्हाट्सप्प – 9837427792
ईमेल – sachchaikijeet7@gmail.com
