काशीपुर। समाज सेविका एवं डीबाली ग्रुप की निदेशक उर्वशी दत्त बाली शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) को बढ़ावा देकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास के 50 बच्चों के जीवन में नई उम्मीद और बेहतर भविष्य की नींव रख रही हैं। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को केवल शिक्षा तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और जीवन की चुनौतियों का सामना करने के योग्य बनाना है। इन 50 बच्चों में कई ऐसे हैं जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया है, जबकि कुछ बच्चे पारिवारिक परिस्थितियों या अन्य कारणों से अपने परिवार से अलग रह रहे हैं। ऐसे बच्चों में आत्मविश्वास जगाना, उनके व्यक्तित्व का विकास करना और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लिए तैयार करना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। इस सामाजिक पहल में द गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल प्रत्येक माह सक्रिय सहयोग प्रदान करता है। विद्यालय अपनी बस के माध्यम से बच्चों को गुरुकुल परिसर लाता है, जहां यंग लीडर्स प्रोग्राम के अंतर्गत स्कूल के विद्यार्थी उनके साथ समय बिताकर संचार कौशल, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क, व्यक्तित्व विकास और जीवनोपयोगी कौशल विकसित करने में सहयोग करते हैं। उर्वशी दत्त बाली की पहल पर बच्चों को सिलाई, आर्ट एवं क्राफ्ट, ग्रूमिंग, हेयर कटिंग, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य, रेस्टोरेंट सर्विस सहित विभिन्न रोजगारपरक और रचनात्मक कौशलों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे भविष्य के लिए नई संभावनाओं की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। उर्वशी दत्त बाली ने कहा कि उनका सपना है कि ये बच्चे भविष्य में किसी के सामने मदद के लिए हाथ फैलाने वाले नहीं, बल्कि अपने हुनर और मेहनत के बल पर स्वयं रोजगार प्राप्त करें और दूसरों को भी रोजगार देने में सक्षम बनें। उनका मानना है कि प्रत्येक बच्चे को सही मार्गदर्शन, अवसर और मंच मिले तो वह अपनी प्रतिभा के दम पर सफलता हासिल कर सकता है। उन्होंने बताया कि इस पहल से गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल के विद्यार्थियों को भी समाज के प्रति संवेदनशील बनने, सेवा भावना विकसित करने और सच्चे नेतृत्व के गुण सीखने का अवसर मिल रहा है। इससे दोनों वर्गों के बच्चों में आपसी सम्मान, सहयोग और मानवीय मूल्यों का विकास हो रहा है। उर्वशी दत्त बाली ने इस सामाजिक अभियान में निरंतर सहयोग के लिए द गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल के चेयरमैन डॉ. नीरज कपूर, डायरेक्टर डॉ. वसुधा कपूर, जेएमडी कामाक्षी कपूर, प्रिंसिपल मीनल बधवार, वाइस प्रिंसिपल शुभांगी शर्मा, ऋषु कुमारी तथा विद्यालय की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा, “हर बच्चे में एक प्रतिभा छिपी होती है। जरूरत केवल उसे पहचानने, निखारने और सही मंच देने की है। यदि समाज, स्कूल और संवेदनशील लोग मिलकर आगे आएं, तो कोई भी बच्चा अपने सपनों से वंचित नहीं रहेगा।”
यह पहल आज केवल 50 बच्चों को कौशल प्रशिक्षण ही नहीं दे रही, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास,आत्मसम्मान, नई उम्मीद और आत्मनिर्भर भविष्य की मजबूत नींव भी प्रदान कर रही है।

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