काशीपुर। शहर के मोहल्ला थाना साबिक में मंसूरी कमेटी की ओर से हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी हजरत इमाम हसन और हजरत इमाम हुसैन की याद में अजीमो-शान मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर शहीद-ए-कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की और देश-दुनिया में अमन, भाईचारे तथा इंसानियत की सलामती के लिए दुआएं कीं।
मजलिस की सरपरस्ती शहर इमाम मुफ़्ती फैज़ान राजा साहब ने की। इस दौरान तशरीफ लाए मुफ़्ती मुकर्रम साहब ने अपने प्रभावशाली बयान में कर्बला की महान कुर्बानी को याद करते हुए कहा कि हजरत इमाम हसन और हजरत इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ भूखे-प्यासे रहकर भी सब्र, हिम्मत और हक़ का दामन नहीं छोड़ा तथा ज़ुल्म और अन्याय के सामने कभी सिर नहीं झुकाया। उन्होंने कहा कि कर्बला का पैगाम इंसानियत, त्याग, सब्र और सत्य के मार्ग पर डटे रहने की प्रेरणा देता है।
उलेमा-ए-किराम ने युवाओं से अपील की कि वे इमाम हसन और इमाम हुसैन की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाकर समाज में प्रेम, भाईचारा और इंसानियत का संदेश फैलाएं।
कार्यक्रम में कारी गुलाम यासीन साहब ने तकरीर और नात पेश कर महफिल को रूहानी रंग में रंग दिया। “या रसूलल्लाह, या हबीब अल्लाह”, “आंखों की ठंडक, दिल का सुकून, या हसन या हुसैन” और “हम हुसैनी हैं” जैसी नातों ने उपस्थित अकीदतमंदों को भावविभोर कर दिया। अपने संबोधन में शहर इमाम मुफ़्ती फैज़ान राजा साहब ने कहा कि यदि इंसान इमाम हसन और इमाम हुसैन के बताए हुए रास्ते पर चले, तो जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान स्वयं मिल सकता है। उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश आज भी पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक है और हमें सत्य, न्याय तथा इंसानियत की राह पर चलने की प्रेरणा देता है।
मजलिस के दौरान पूरा माहौल गम और अकीदत से सराबोर रहा। अंत में सलाम पेश किया गया और मुल्क में अमन-चैन, भाईचारे, खुशहाली तथा पूरी इंसानियत की सलामती के लिए सामूहिक दुआ कर कार्यक्रम का समापन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न इमाम हजरात, उलेमा-ए-किराम एवं बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।

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