बांग्लादेश हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. फैसले के मुताबिक, अब पहली बार बांग्लादेश में हिंदू विधवाओं को अपने दिवंगत पतियों की कृषि और गैर-कृषि जमीन दोनों का अधिकार होगा.

बांग्लादेश हाईकोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाया कि कृषि और गैर-कृषि जमीन में कोई अंतर नहीं किया गया है. इसलिए हिंदू विधवाओं को अपने पति की भूमि पर अधिकार है. ‘द डेली स्टार’ के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई ने यह खबर दी. मौजूदा नियमों के तहत, बांग्लादेश में हिंदू विधवाएं केवल अपने पति के घर की मालकिन हैं, न कि कृषि भूमि जैसी कोई अन्य संपत्ति पर उनका अधिकार है.

अदालत के आदेश का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है, “हिंदू विधवाओं को कृषि और गैर-कृषि भूमि दोनों का अधिकार होगा जो उनके पति के थे. उन्हें अपने जीवनकाल के दौरान कानूनी आवश्यकताओं के लिए जमीन बेचने का भी अधिकार होगा.” हाईकोर्ट का यह फैसला एक याचिका पर सुनवाई के दौरान आया जिसे खुल्ना जिले के एक व्यक्ति ज्योतिंद्रनाथ मंडल ने दाखिल की थी. मंडल ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

7 मार्च 2004 को, खुल्ना के संयुक्त जिला जज ने ज्योतिंद्रनाथ की ओर से दायर एक मामले में फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया था कि ज्योतिंद्रनाथ के बड़े भाई अविमानु मंडल की विधवा गौरी दासी को अपने दिवंगत पति की कृषि भूमि पर अधिकार मिलेगा. अविमानु की 1996 में मौत के बाद यह जमीन गौरी के नाम से दर्ज थी. ज्योतिंद्रनाथ ने गौरी के नाम दर्ज जमीन के खिलाफ खुल्ना कोर्ट में याचिका दायर की थी.

By Mohd Nafees

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