पत्रकार वार्ता में उन्होंने खुद ही खुद को निर्दोष करार दे डाला। साथ ही कहा कि शासन से मांग करता हूं कि इस घटना की उच्चस्तरीय जांच की जाए और जो भी दोषी हैं उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। चेयरमैन ने कहा कि इस प्रकरण की जांच में यदि वह भी दोषी पाए जाए तो हर कार्रवाई के लिए तैयार हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि दुर्घटना में हताहत हुए परिवारों को दी गई आर्थिक सहायता बढ़ाई जाए। उन्होंने कुछ राजनीतिक लोगों पर शव रखकर राजनीति करने का आरोप भी लगाया है। —- जांच हुई नहीं, कर दिया 35 लाख का भुगतान
चेयरमैन विकास तेवतिया ने दावा किया कि ठेकेदार अजय त्यागी को करीब 55 लाख रुपये का ठेका उक्त भवन निर्माण का दिया गया था। अब तक करीब 35 लाख का भुगतान किया जा चुका है। अंत्यष्टि स्थल निर्माण की जांच से पहले यह भुगतान कर दिया गया है। चेयरमैन का दावा है कि परिषद में कोई कमीशनखोरी नहीं होती है। निर्माण कार्यों के ठेके ई-टेंडरिग प्रक्रिया के तहत दिए जाते हैं। सवाल किया गया कि संस्था के मुखिया होने के नाते निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग कैसे हो गया तो वह बोले कि जांच करना इंजीनियर और अधिशासी अधिकारी का काम है। बार-बार वह परिषद के अफसरों एवं अभियंताओं को इस हादसे का जिम्मेदार बताते रहे और खुद को निर्दोष बताते रहे। —- दुख बांटने गए नहीं
हादसे में दो दर्जन लोगों की जान चली गई है। कई परिवार उजड़ गए हैं लेकिन चेयरमैन को उनके घर जाकर दुख बांटने नहीं गए। उन्होंने दावा किया कि दो दिन से शहर से बाहर गए हुए थे। सोमवार को लौटे तो सीधे पहले पत्रकार वार्ता करने लगे। मुख्यमंत्री द्वारा इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जा रही है लेकिन वह इससे भी बड़ी सीबीआइ जैसी एजेंसी से जांच कराए जाने की बात कह रहे हैं। कभी कहते हैं कि वह संस्था के मुखिया हैं और हर सही-गलत कार्य की जिम्मेदारी उनकी बनती है लेकिन पलटकर बोल रहे हैं कि हादसे में वह दोषी नहीं है।

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