पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में मंगलवार को कई खापों ने केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में पंचायत की हैं। किसान आंदोलन को समर्थन दिया है और वह 17 दिसंबर को दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की घोषणा कर दी है। इससे दिल्ली-यूपी की सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन को और मजबूती मिल जाएगी।
‘अखिल खाप परिषद’ के सचिव सुभाष बालियान ने कहा कि शाहपुर क्षेत्र के शोरम गांव में सोमवार को खाप प्रमुखों की बैठक हुई है। प्रमुखों की पंचायत में यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि खाप प्रमुखों ने केंद्र के नए कृषि कानूनों को किसान विरोधी करार दिया और उन्हें वापस लेने की मांग की है। सुभाष बालियान ने कहा कि उन्होंने 17 दिसंबर को दिल्ली जाकर आंदोलन को समर्थन देने का फैसला किया है।
उन्होंने बताया कि बैठक में बालियान खाप प्रमुख और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत, लतियान खाप प्रमुख बिजेंदर सिंह, देश खाप प्रमुख शरणवीर सिंह, अहलावत खाप प्रमुख गजेंद्र सिंह, निरवाल खाप प्रमुख राजवीर मुंडेत, कुंडू खाप प्रमुख चौधरी उपेंद्र कुंडू और बेनीवाल खाप प्रमुख अमित बेनीवाल उपस्थित थे।
आपको बता दें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट बिरादरी की खापों का सामाजिक समीकरण में महत्वपूर्ण स्थान है। पिछले करीब 3 सप्ताह से भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और बालियान खाप के प्रमुख नरेश टिकैत केंद्र सरकार के खिलाफ धरना दे रहे हैं। केंद्र और किसानों के बीच लगातार बातचीत तो चल रही है, लेकिन समाधान नहीं निकल रहा है। ऐसे में कुछ रणनीतिज्ञों का कहना है कि केंद्र सरकार जानबूझकर आंदोलन को लंबा खींचने दे रही है। सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि इससे किसानों का आंदोलन कमजोर पड़ेगा और सरकार को समाधान तलाशने में सहूलियत होगी।
अब दूसरी ओर राकेश टिकैत और किसान यूनियन के नेताओं ने खाप नेताओं से संपर्क साधा है। बड़ी बात यह है कि खाप नेताओं ने राकेश टिकैत के आंदोलन को समर्थन दे दिया है। लिहाजा, आने वाले दिनों में दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर किसानों की संख्या बढ़ सकती है। जिससे किसान आंदोलन ज्यादा मजबूत होगा।

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