ऋषिकेश एम्स के किच्छा स्थित सैटेलाइट सेंटर में नियुक्ति के नाम पर कथित फर्जीवाड़े की जांच के बीच अब संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। एफआईआर में दो लाख रुपये की बरामदगी का उल्लेख होने के बावजूद प्रेस विज्ञप्ति में संबंधित आउटसोर्स कर्मचारी का नाम न होने से मामले को लेकर नए सवाल खड़े हुए हैं। एम्स के किच्छा स्थित सेटेलाइट सेंटर में नियुक्ति के नाम पर कथित फर्जीवाड़े के मामले में अब एम्स के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। आरोप है कि जिन लोगों से रकम ली गई और जो स्वयं इस पूरे प्रकरण में पीड़ित बताए जा रहे हैं, एम्स कर्मचारियों ने उन्हें ही मामले में आरोपी बना दिया गया, जबकि दो लाख रुपये की बरामदगी एम्स के आउटसोर्स कर्मवारी दीपक गुसाईं से होने के बावजूद एम्स की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में उसका नाम तक शामिल नहीं किया गया था।

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि दो लाख रुपये दीपक गुसाईं से बरामद हुए थे तो एम्स की ओर से जारी प्रेस नोट में उसका नाम क्यों नहीं उजागर किया गया। आरोप है कि इस तरह प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से मामले की दिशा को प्रभावित करने और पुलिस पर पीड़ितों के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बनाने का प्रयास किया गया।

अंशुल की भूमिका की भी जांच किए जाने की बात सामने आई
एफआईआर में दीपक गुसाईं से दो लाख रुपये बरामद होने का उल्लेख है, जबकि संबंधित प्रेस नोट में उसका नाम सामने नहीं आया। इसी अंतर ने एम्स की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में इस पूरे प्रकरण में शामिल अंशुल नाम के व्यक्ति का नाम भी सामने आ रहा है। जो संस्थान से संबंधित बताया जा रहा है। आरोप है कि अंशुल नाम के व्यक्ति ने दीपक गुसाईं को बचाने का प्रयास किया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस की ओर से अंशुल की भूमिका की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में जांच का दायरा केवल नियुक्ति के नाम पर कथित धनराशि लेने वालों तक सीमित न रहकर उन लोगों की भूमिका तक पहुंच गया है, जिन पर आरोपियों को संरक्षण देने या मामले की दिशा प्रभावित करने का संदेह जताया जा रहा है। अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि रकम की बरामदगी, एफआईआर में दर्ज तथ्यों और एम्स की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में अंतर की वजह क्या थी। साथ ही, यदि पीड़ितों को ही आरोपी बनाए जाने के आरोप सही हैं तो इसके पीछे किन परिस्थितियों में कार्रवाई हुई, यह भी जांच का अहम बिंदु होगा। कुल मिलाकर देखा जाए तो पूरे प्रकरण में एम्स भी पाक साफ नहीं है।

By Mohd Nafees

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