मराठा आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद मराठा समुदाय आक्रामक है। सकल मराठा समाज ने आरक्षण मिलने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। वहीं, छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज संभाजी राजे ने आरक्षण के लिए तलवार तक निकालने की धमकी दे दी। इसके बाद ओबीसी नेताओं में भी उबाल आ गया है। इससे सूबे में मराठा और ओबीसी समाज के बीच आरक्षण को लेकर तलवारें खिंच गई हैं।
संभाजी राजे ने एक दिन पहले उस्मानाबाद में कहा कि राज्य सरकार हमारें संयम की परीक्षा न ले। मराठा समाज भीख नहीं बल्कि अपना हक मांग रहा है। आवश्यकता पड़ी तो मराठा आरक्षण के लिए हम तलवार भी निकालेंगे। भाजपा सांसद संभाजी राजे ने कहा कि साल 1902 में छत्रपति शाहूजी महाराज ने पहली बार रियासत में आरक्षण लागू किया था, जिसमें मराठा समाज का भी समावेश था। मराठा समुदाय में 80 फीसदी लोग गरीब हैं। लेकिन मराठा आरक्षण को लेकर राज्य सरकार की तरफ से कोई ठोस प्रयास होता नहीं दिखाई दे रहा है।
तो क्या ओबीसी समाज पर चलेगी ये तलवार -भुजबल
छत्रपति संभाजी राजे के इस बयान के बाद महाराष्ट्र के बड़े ओबीसी नेता एवं खाद्य व आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल और राहत व पुनर्वास मंत्री विजय वडेट्टीवर ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि क्या उस तलवार का इस्तेमाल पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) पर होगा या किसी अन्य समाज पर। उन्होंने कहा कि राजा किसी विशेष समुदाय का नहीं बल्कि पूरी जनता का होता है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने अठ्ठारह पगड़ जाति (सभी पिछड़े वर्ग) को साथ लेकर लड़ाइयां लड़ी थी। भुजबल एनसीपी के और वडेट्टीवार प्रदेश कांग्रेस में ओबीसी समाज का बड़ा चेहरा हैं। दोनों ने ही एमपीएससी की परीक्षा रद्द करने का विरोध किया है। साथ ही, ओबीसी समाज को मिल रहे आरक्षण में किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं करने की चेतावनी दी है।
मराठों के दबाव में है ठाकरे सरकार, ओबीसी में बढ़ी नाराजगी
महाराष्ट्र में शिवेसना-कांग्रेस और एनसीपी की महाविकास आघाड़ी सरकार का चेहरा वस्तुतः मराठा ही है। इसलिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे मराठों के दबाव में हैं। बीते 15 दिनों में ठाकरे सरकार ने मराठा समाज के दबाव में तीन बड़े फैसले किए हैं। पहले पुलिस भर्ती पर रोक लगाई। उसके बाद सरकार ने मराठा समुदाय को इकोनॉमिकल बैकवर्ड क्लास (ईबीसी) के तहत आरक्षण देने की घोषणा की थी, लेकिन मराठा संगठनों के विरोध के चलते फैसला वापस लेना पड़ा। उसके बाद 11 अक्तूबर को होने वाली राज्य लोकसेवा आयोग (एमपीएसी) की परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इससे राज्य के पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में जबरदस्त नाराजगी दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में मराठा व ओबीसी के बीच आरक्षण को लेकर संघर्ष और तेज हो सकता है।

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