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काशीपुर। समाजसेवी उर्वशी दत्त बाली का मानना है कि आज के दौर में महिलाओं के सामने अक्सर यह प्रश्न खड़ा किया जाता है कि उन्हें करियर चुनना चाहिए या परिवार। लेकिन उनके अनुसार यह दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि सही समझ, सहयोग और संतुलन के साथ दोनों जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाया जा सकता है। उर्वशी दत्त बाली ने कहा कि उनके लिए एक सफल कामकाजी महिला वही है, जो अपने व्यवसाय, परिवार और सामाजिक दायित्वों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर सके। उन्होंने बताया कि उन्होंने हमेशा अपने परिवार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। पति के साथ कारोबार में सहयोग करने के साथ-साथ घर-परिवार और बेटी की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया तथा सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि जब उनके पति राजनीति में आए तो उन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया। उनका मानना है कि विवाह के बाद पति-पत्नी केवल जीवनसाथी नहीं रहते, बल्कि एक मजबूत टीम बन जाते हैं। जब दोनों एक-दूसरे के सपनों, भावनाओं और जिम्मेदारियों का सम्मान करते हैं, तभी परिवार और समाज दोनों आगे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि समायोजन केवल महिला की नहीं, बल्कि पति-पत्नी दोनों की जिम्मेदारी होती है। उर्वशी दत्त बाली ने कहा कि वह यह नहीं मानतीं कि कामकाजी महिला बनने का अर्थ परिवार की उपेक्षा करना है। वहीं, घर और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने वाली महिला भी किसी कामकाजी महिला से कम नहीं होती। हर परिवार की परिस्थितियां अलग होती हैं और प्रत्येक महिला अपने जीवन का रास्ता स्वयं तय करती है। यदि वह अपने सपनों, रिश्तों और परिवार के बीच संतुलन बना ले, तो यही उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराएं परिवार, सहयोग और जिम्मेदारी का महत्व सिखाती हैं। उनके लिए परिवार केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है। इसी ताकत ने उन्हें अपने सपनों को साकार करने और समाज के लिए सकारात्मक कार्य करने का आत्मविश्वास दिया।
उर्वशी दत्त बाली ने कहा कि उनका जीवन मंत्र है— “परिवार पहले, फिर करियर और साथ-साथ समाज के प्रति अपना उद्देश्य।” उनका कहना है कि जब परिवार आपका सबसे बड़ा सहयोगी बन जाता है, तब व्यक्ति अपने सपनों को भी पूरा कर सकता है और समाज के लिए प्रेरणा भी बन सकता है। उन्होंने कहा कि सच्ची सफलता वही है, जिसमें परिवार खुश रहे, कार्यक्षेत्र में निरंतर प्रगति हो और व्यक्ति के प्रयासों से समाज में भी सकारात्मक बदलाव आए। परिवार और करियर एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों के बीच संतुलन, आपसी सम्मान और परिवार की सहमति के साथ आगे बढ़ना ही एक सफल महिला और सफल गृहिणी की पहचान है।

By Mohd Nafees

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