बिहार प्रशासन आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी में व्यस्त है, दूसरी तरफ राज्य में कोरोना से निपटने की रणनीतियों को लेकर राजनीति तेज हो गई है.

महामारी के शुरुआती दिनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञ बिहार को लेकर चिंतित थे क्योंकि यहां न सिर्फ भारत की सबसे ज्यादा प्रवासी आबादी रहती है, बल्कि स्वास्थ्य सुविधाएं भी ठीक नहीं हैं.

लेकिन कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में बिहार काफी आगे निकलता दिख रहा है, क्योंकि यहां केसों की संख्या उल्लेखनीय ढंग से कम हो गई है. विशेषज्ञों की राय है कि रैपिड एंटीजन टेस्ट (RAT) का व्यापक उपयोग भी केसों में गिरावट का एक कारण हो सकता है जिसकी विश्वसनीयता पहले से ही सवालों के घेरे में है.

बिहार में तेजी से कम होते केस

अगर सितंबर के पिछले दो हफ्तों (11-23 सितंबर) की तुलना अगस्त की इसी अवधि (11-23 अगस्त) से करें तो राज्य के लगभग सभी जिलों में कम केस दर्ज किए गए हैं.

जिलेवार आंकड़ों से पता चलता है कि बिहार के 38 में से 36 जिलों में कोरोना केसों की संख्या कम हो गई है. सबसे ज्यादा गिरावट पटना में दर्ज हुई है. 11-23 अगस्त के बीच पटना में जितने केस दर्ज हुए थे, उसकी तुलना में 11-23 सितंबर के बीच 1,817 केस कम दर्ज हुए.

इसके अलावा, पश्चिम चंपारण में 1,325, बेगूसराय में 1,249 और मधुबनी में 1,188 कम केस दर्ज हुए. सिर्फ सुपौल और जमुई दो ऐसे जिले हैं जहां 11-23 अगस्त की तुलना में सितंबर की इसी अवधि में ज्यादा केस दर्ज हुए हैं. सुपौल में 270 और जमुई में 53 केस ज्यादा दर्ज हुए हैं.

By Mohd Nafees

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