काशीपुर। डी बाली ग्रुप की डायरेक्टर एवं समाजसेवी उर्वशी दत्त बाली ने 26 जनवरी और अपने पति, महापौर दीपक बाली के 52वें जन्मदिन के अवसर पर बच्चों और युवाओं को एक प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने आज की युवा पीढ़ी में बढ़ती दिखावे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए सादगी, मेहनत और आत्मविकास को जीवन की असली पहचान बताया। उर्वशी बाली ने कहा कि इतिहास गवाह है कि देश और समाज को दिशा देने वाले सभी महापुरुषों ने सादा जीवन और उच्च विचार अपनाए। चाहे पंडित लाल बहादुर शास्त्री हों, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम हों या राष्ट्रपिता महात्मा गांधी—किसी ने भी दिखावे की जिंदगी नहीं जी। आज के समय में ब्रांडेड कपड़ों और महंगे सामान को ऊंचे कद का पैमाना बना दिया गया है, जबकि वास्तविक ऊंचाई इंसान के विचार और कर्म तय करते हैं।
उन्होंने कहा कि ब्रांडेड चीज़ें लोग कुछ दिन देखते हैं, लेकिन आपकी मेहनत, सोच और व्यक्तित्व आपको जीवन भर पहचान दिलाते हैं। कपड़े बदल जाते हैं, मोबाइल मॉडल बदल जाते हैं, फैशन बदल जाता है, लेकिन इंसान की असली पहचान वही रहती है जो वह अपने कर्मों से बनाता है। उर्वशी बाली ने युवाओं को सलाह दी कि पैसा कमाना गलत नहीं है, लेकिन असली समझदारी यह है कि उसे कहां और कैसे खर्च किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि आपके पास संसाधन हैं, तो उसका एक हिस्सा अपने विकास में लगाइए—किताबों, शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य और सकारात्मक सोच में निवेश कीजिए। आत्मनिर्भर और सक्षम बनने के बाद किसी बाहरी ब्रांड की जरूरत नहीं पड़ती।
उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता जताई और कहा कि आज युवा दिखने में व्यस्त हैं, कुछ बनने में नहीं। सोशल मीडिया पर लाइक मिल जाते हैं, लेकिन असली जीवन में सम्मान केवल मेहनत, ईमानदारी और काबिलियत से मिलता है। अपने पति महापौर दीपक बाली के जीवन से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा दिखावे से दूर रहकर मेहनत और ईमानदारी को प्राथमिकता दी। “मैंने उन्हें पिछले 25 वर्षों से देखा है। कभी थकान की शिकायत नहीं, हमेशा चेहरे पर मुस्कान और काम के प्रति समर्पण। उन्होंने कभी ब्रांड पहनकर खुद को बड़ा नहीं दिखाया, बल्कि कड़ी मेहनत से खुद को एक पहचान बनाया,” उन्होंने कहा।
उन्होंने बच्चों से अपील करते हुए कहा कि समय सबसे कीमती पूंजी है, जो दोबारा नहीं लौटती। यह उम्र, यह ऊर्जा और यह अवसर बार-बार नहीं मिलते। यदि आज खुद को नहीं पहचाना और खुद पर काम नहीं किया, तो कल दुनिया आपको भीड़ का हिस्सा मान लेगी। अंत में उन्होंने कहा कि कपड़ों का ब्रांड बदल सकता है, मोबाइल का मॉडल बदल सकता है, लेकिन आपकी पहचान वही रहती है जो आपने खुद बनाई है। इसलिए दिखावे की दौड़ छोड़िए और खुद को ब्रांड बनाइए—क्योंकि असली ब्रांड वही होता है जो पूरी ज़िंदगी दिखाई देता है, सिर्फ कुछ दिनों के लिए नहीं।

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