राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों का 28वां सम्मेलन 14 से 16 जनवरी तक भारत में आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में 28वीं कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रेसिडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस (CSPOC) 2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री का स्वागत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि यह चौथा अवसर है जब कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रेसिडिंग ऑफिसर्स का सम्मेलन भारत में हो रहा है। इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य विषय “संसदीय लोकतंत्र की प्रभावी डिलीवरी” है।
देश की पहली नागरिक और दिल्ली की मुख्यमंत्री—दोनों महिलाएं
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की राष्ट्रपति देश की पहली नागरिक हैं और वे एक महिला हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री भी महिला हैं। आज भारतीय महिलाएं न केवल लोकतंत्र में भागीदारी कर रही हैं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका भी निभा रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में जाना जाता है और इसका पैमाना असाधारण है। 2024 के आम चुनाव मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास थे, जिसमें लगभग 98 करोड़ मतदाताओं ने पंजीकरण कराया। चुनाव में 8,000 से अधिक उम्मीदवार और 700 से ज्यादा राजनीतिक दल शामिल हुए, वहीं महिलाओं की रिकॉर्ड मतदान भागीदारी देखने को मिली।
संविधान सदन का ऐतिहासिक महत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस स्थान पर यह सम्मेलन हो रहा है, वह भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का साक्षी रहा है। गुलामी के अंतिम वर्षों में इसी सेंट्रल हॉल में संविधान सभा की बैठकें हुई थीं। आज़ादी के बाद 75 वर्षों तक यह भवन संसद रहा और यहीं देश के भविष्य से जुड़े कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए। अब इसे लोकतंत्र को समर्पित करते हुए संविधान सदन नाम दिया गया है।
कॉमनवेल्थ देशों के साथ साझा अनुभव
प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉमनवेल्थ देशों की कुल जनसंख्या का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा भारत में निवास करता है। भारत स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक विकास और नवाचार जैसे क्षेत्रों में कॉमनवेल्थ के सतत विकास लक्ष्यों को लेकर पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रहा है। भारत न केवल अन्य देशों से सीखता है, बल्कि अपने अनुभवों को साझेदार देशों के साथ साझा भी करता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक दक्षिण के लिए नए रास्ते तलाशने का यह उपयुक्त समय है।
स्पीकर की भूमिका पर पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में स्पीकर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। स्पीकर का कार्य केवल अध्यक्षता करना नहीं, बल्कि सभी सदस्यों को निष्पक्ष, संतुलित और गरिमापूर्ण वातावरण प्रदान करना भी है। धैर्य और सहनशीलता स्पीकर की सबसे बड़ी विशेषता होती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है। वेदों से लेकर आधुनिक लोकतंत्र तक, भारत में निर्णय लेने से पहले व्यापक विचार-विमर्श और आम सहमति की परंपरा रही है। स्वतंत्रता के समय कई लोगों को संदेह था कि इतनी विविधता वाला देश लोकतंत्र को संभाल पाएगा या नहीं, लेकिन यही विविधता भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बनी।
उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। UPI दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली बन चुकी है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता और इस्पात उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं ने भारत को स्थिरता, गति और विस्तार प्रदान किया है।

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