(सगीर चंकी पांडे,रिपोर्टर)
70 सालों से लेकर अब तक अंधेरे में जी रहे हैं गांव के लोग जनपद मुरादाबाद के तहसील ठाकुरद्वारा मैं एक ऐसा भी गांव है जहां अंधेरे के साए में रहने को मजबूर हैं लोग वहां की जनता- जहां एक तरफ सरकारे कह रही हैं कि हर गांव को बिजली, पानी की व्यवस्था व शिक्षा के लिए स्कूल मुहैया कराए जा रहे हैं दूसरी ओर आने वाला कल हमारा डिजिटल भारत होगा। तो वही एक ऐसा भी गांव हैं जो इन सभी सुविधाओं से वंचित है। सरकार की हर सुविधा को तरसते ग्रामवासी आने वाला कल डिजिटल भारत इस क्या इस गांव की किस्मत बदल सकता है। या नहीं
यह कहानी है ठाकुरद्वारा तहसील के गांव शेरपुर बहेलीन मझरा की जहां गांव की हालत बद से बदतर है। इस गांव में अभी तक ना तो लाइट की व्यवस्था हो पाई है और ना ही सड़क निर्माण की। इस गांव मैं 90 परिवारों के लोग रहते हैं जिसकी आबादी 200 के पार है। गांव में मात्र दो ही सरकारी हैंडपंप है जिनका पानी दूषित आता है। यह लोग उसी पानी को पीते हैं अब इनका भगवान ही मालिक है एक तरफ करो ना वायरस जैसी बीमारी से झूल रहा देश विदेश के लोग ऐसे में लोग पानी पीने की तो अलग बात है आज अपन हाथ तक हैंड वॉश या साफ पानी से धो रहे हैं लेकिन यहां तहसील ठाकुरद्वारा ग्राम शेरपुर बहरीन मजरा के लोग उस पानी को पी कर अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं इस पानी को पीने से बच्चे बड़े बीमार पड़ जाते हैं। पशु भी इस पानी को पीने से बीमार हो जाते हैं। इस गांव की यह बदहाली है के ना तो यहां शिक्षा के लिए कोई स्कूल अभी तक बन पाया और ना ही स्वास्थ्य समुदाय। कुछ ग्रामीणों ने सच्चाई की जीत मंडल रिपोर्टर से बात कर हमारे रिपोर्टर को बताया बताया कि यहां वोट की राजनीति होती है जब भी कभी चुनाव का समय आता है वोट मांगने बड़े-बड़े नेता यहां हाथ जोड़कर हम से बहुत मांग कर हमें लाइट जलाने का दिलासा देकर स्कूल दिलाने का दिलासा देकर व्यस्त सड़क निर्माण की झूठी मन्नत बनाकर ग्राम वासियों का बोर्ड ले जाते हैं और बेचारे ग्रामवासी वही अंधेरे और कचरे जैसे पानी को पीकर भगवान का शुक्र अदा कर रहे हैं ग्राम वासियों ने यह भी बताया यहां कोई आला अफसर कोई अधिकारी आज तक गांव की बदहाली तक देखने नहीं आ पाए यहां से ं जीतने के वाद इस गांव की कोई सुध नहीं लेता। इस गांव का यह आलम है कि यहां अभी तक लाइट की व्यवस्था भी नहीं हो पाई। अंधेरे के साए में बच्चे अपनी पढ़ाई करते है। गांव में स्कूल ना होने के कारण छोटे-छोटे बच्चे गांव से 5 से 6 किलोमीटर दूर दूसरे स्कुलो में पढ़ने जाते हैं। शायद ही यह एक ऐसा गांव है जहां कोई भी सुविधा नहीं है। गांव के चारों तरफ जंगल है जहां जंगली जानवर अंधेरे का फायदा उठाकर कभी भी किसी पर हमला बोल देते हैं। क्या यही है हमारा भारत जहां गांव में मूलभूत सुविधाएं भी अभी तक नहीं पहुंच पाई है।

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