बागेश्वर। राजकीय हाईस्कूल लेटी में तैनात शिक्षक राजेंद्र सिंह पूना शिक्षण कार्य के साथ बच्चों को पर्यावरण और जल संरक्षण का पाठ भी पढ़ा रहे हैं। उन्होंने स्कूल के पास प्राकृतिक स्रोत से रिसकर बर्बाद हो रहे पानी को धारे की शक्ल देकर पीने लायक बनाया। विद्यार्थियों की मदद से पास ही एक चाल-खाल (तालाब) भी तैयार किया जिसमें जमा पानी से जानवर अपनी प्यास बुझा रहे हैं।

सामाजिक विज्ञान के शिक्षक राजेंद्र सिंह पूना को बचपन से ही प्रकृति से लगाव रहा है। घर के पास बने धारे की महीने में एक बार सफाई करना उनकी दिनचर्या में शामिल है। धारे के पानी को संरक्षित करने के लिए वह हर साल धारे के पास पौधरोपण भी करते हैं। शिक्षक पूना बताते हैं कि उनके विद्यालय के पास प्राकृतिक जल स्रोत था, जहां से पानी लगातार रिसता रहता था।
वर्ष 2021 में उन्होंने इसे संरक्षित करने और उपयोग में लाने का विचार किया। उन दिनों लॉकडाउन के चलते अधिकतर समय विद्यालय बंद रहता था। बाद में जब स्कूल खुला तो उन्होंने प्राकृतिक स्रोत के आसपास खोदाई करना शुरू कर दिया। पहले उन्होंने अकेले ही इस काम को शुरू किया, बाद में विद्यार्थी भी इसमें शामिल हो गए।
पानी के स्रोत के पास दीवार बनाकर इसे धारे की शक्ल दी गई। धारे से निकलने वाला साफ पानी लोगों के पीने के लिए प्रयोग में आने लगा।
बर्बाद हो रहे पानी के लिए बनाया चाल-खाल
शिक्षक राजेंद्र सिंह पूना का कहना है कि धारे से निकलने वाले पानी पीने और जानवरों के लिए उपयोग में लाने का विचार किया और खोदाई कर एक तालाब बनाया। दो साल पहले तक जो पानी बर्बाद होकर विद्यालय के पास की जमीन को दलदली बना रहा था, आज उसी स्रोत के पानी से लोग और पशु दोनों की प्यास बुझ रही है।अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करे

By Mohd Nafees

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