मेजर प्रशांत की प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर कौसानी में हुई। नवोदय विद्यालय ताड़ीखेत से उन्होंने कक्षा छह से आठ तक की शिक्षा हासिल की। आठवीं पास करने के बाद उनका चयन सैनिक स्कूल घोड़ाखाल के लिए हुआ।मेजर प्रशांत की प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर कौसानी में हुई। नवोदय विद्यालय ताड़ीखेत से उन्होंने कक्षा छह से आठ तक की शिक्षा हासिल की। आठवीं पास करने के बाद उनका चयन सैनिक स्कूल घोड़ाखाल के लिए हुआ।
पहले ही प्रयास में पास किया था एनडीए
मेजर प्रशांत की प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर कौसानी में हुई। नवोदय विद्यालय ताड़ीखेत से उन्होंने कक्षा छह से आठ तक की शिक्षा हासिल की। आठवीं पास करने के बाद उनका चयन सैनिक स्कूल घोड़ाखाल के लिए हुआ। वहां से इंटरमीडिएट पास करने के बाद पहले ही प्रयास में उनका चयन एनडीए में हुआ। चार साल का कोर्स करने के बाद वर्ष 2014 में वह भारतीय सेना के दो पैरा स्पेशल फोर्स में लेफ्टिनेंट के पद पर चुने गए।
बॉर्डर पर कई ऑपरेशनों को दे चुके अंजाम
सेवाकाल में बॉर्डर पर हुए कई सफल ऑपरेशन में उनकी कुशल नेतृत्व क्षमता और साहस को देखते हुए गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर वीरता पुरस्कारों के लिए चयनित जाबांजों में उन्हें भी सेना मेडल के लिए चुना गया है। मेजर प्रशांत वर्तमान में महू में जूनियर कमांड का प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं।
दादा से मिली सेना में जाने की प्रेरणा
मेजर प्रशांत के पिता भुवन मोहन भट्ट सेवानिवृत इंजीनियर और माता किरन भट्ट गृहणी हैं। उनको सेना में जाने की प्रेरणा अपने दादा स्वर्गीय एचडी भट्ट से मिली थी। उनके दादा प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत थे, वह अपने पोतों को वीर जवानों की गाथा सुनाकर देशभक्ति का पाठ पढ़ाते थे। बचपन से वीरता की कहानियां सुनते हुए प्रशांत ने सेना को ही अपने जीवन का लक्ष्य बनाया।

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