पतंग बाजी किसी टाईम पर शौक के लिये की जाती थी फ़िर इसमें कुछ त्योहारों में रस्म की तरह शामिल कर लिया गया फ़िर धीरे धीरे पतंग बाजी कुछ लोगों के लिये एक नशे की चीज़ हो गयी। जिसमें लोग बच्चे या जवान कटी पतंग को लूटने के लिये सड़क पर बेतहाशा दौड़ते हैं और हादसों का शिकार हो जाते हैं छत से गिर जाते हैं यहाँ तक कि जान से भी हाथ धो बैठ्ते हैं इसी के साथ पतंग के शौकीन पतंगबाज़ी को एक जंग समझने लगे हैं जैसा कि कहा जाता है प्यार और जंग में सब जायज़ है उसी तर्ज़ पर ये पतंग बाज़ लोग पेंच लड़ाने व जीतने के लिये तेज़ माँझा इस्तेमाल करते हैं उससे मन नहीं भरता है तो खतरनाक चाईनीज़ माँझा इस्तेमाल करते हैं, और उसमें भी तसल्ली नहीं होती है, तो इंसानियत को ताक पर रख कर लोहे की तार बांध कर पतंग उड़ाते जिससे अब पतंग बाजी से होने वाले हादसे लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जहाँ लोहे की तार से लोगों के लिये खतरा बना रहता है वहीं बिज़ली की तार पर टेच होते ही धमाका होता है और लाईट गुल हो जाती है ट्रान्सफ़ार्मर उड़ जाते हैं उसके बाद चाईनीज़ माँझा तो लोगों के लिये छिपा हुआ हथियार साबित होता है कब किसी की गर्दन उड़ा दे कब किसकी की नाक काट दे कब किसी की मौत का कारण बन जाये पता ही नहीं लगता है!
बुलाकी अड्डे के नये पुल पर इसी पतंग बाजी के चलते सलमान नामक युवक की गरदन खतरनाक तरीके से कटने से वो घायल हो चुका है, और अब ये नाका पुल पर हुआ हादसे में घायल युवक घायल हो गया है ।
एक बहुत बड़ा सवाल पैदा होता है कि क्या शासन प्रशासन के जिम्मेदार लोग जो ज़रा ज़रा सी बात पर कानून बना देते हैं और जनता को बाध्य करते हैं उस कानून को मानने के लिये तो क्या वो पूरी तरह से पतंग बेचने व उड़ाने के खिलाफ सख्त कानून बनायेंगे ?
थाने स्तर पर इसकी मिटिन्ग हो और इस पर पूर्ण पाबंदी लगाई जाये।
ताकि इस तरह के हादसों से बचा जा सके।

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