“किसी भी शिक्षा संस्थान को बंद करने का मतलब छात्रों को नुकसान पहुंचाना है. इस तरह के फै़सले छात्रों के हित के लिए नहीं लिए जाते बल्कि इन सबके पीछे राजनीति होती है. कांग्रेस कह रही है कि अगर उनकी पार्टी सरकार में आई तो मदरसों को फिर से खोल दिया जाएगा. यह साफ़ तौर पर राजनीतिक मुद्दा है. जबकि असम में मदरसा शिक्षा व्यवस्था बहुत पुरानी है और मैं खुद मदरसे से पढ़ाई कर आज यहां शिक्षक बना हूं.”

जोरहाट ज़िले के मेलामाटी स्थित मदरसा-ए-इस्लामिया में उर्दू-अरबी पढ़ाने वाले मौलाना रफ़ीक़ बड़ी मायूसी के साथ ये बातें कहते हैं.

दरअसल असम सरकार ने राज्य-संचालित सभी मदरसों और संस्कृत टोल्स या संस्कृत केंद्रों को बंद करने का निर्णय लिया है.

असम के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को कहा, “सरकार द्वारा संचालित या फंडेड मदरसों और टोल्स को अगले पांच महीनों के भीतर नियमित स्कूलों के रूप में पुनर्गठन किया जाएगा. ऐसा इसलिए क्योंकि एक धर्मनिरपेक्ष सरकार का काम धार्मिक शिक्षा प्रदान करना नहीं है. हम धार्मिक शिक्षा के लिए सरकारी फंड ख़र्च नहीं कर सकते. इसके लिए नवंबर में एक अधिसूचना जारी की जाएगी.”

By Mohd Nafees

संपादक – सच्चाई की जीत पता – Nafees Screen Printers, Near Bilal Masjid, Ward no. 10, Ali Khan, Kashipur 244713 संपर्क – 9837427792 व्हाट्सप्प – 9837427792 ईमेल – sachchaikijeet7@gmail.com