त्तराखंड बीजेपी में लंबे समय से सुलग रही अंतर्कलह अब खुलकर सामने आ गई है। गदरपुर विधायक और पार्टी के कद्दावर नेता अरविंद पाण्डेय द्वारा हालिया बयानों से यह चिंगारी अब शोले का रूप लेती दिखाई दे रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यही हालात रहे तो 2027 के चुनाव से पहले कई नेताओं के राजनीतिक आशियाने इसकी चपेट में आ सकते हैं।
मशहूर शायर राहत इंदौरी का शेर इन हालात पर सटीक बैठता है—
“लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में,
यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है।”
इसी शायराना अंदाज़ में काशीपुर नगर निगम के मेयर और बीजेपी के वरिष्ठ नेता दीपक बाली ने भी गदरपुर विधायक अरविंद पाण्डेय पर तीखा हमला बोला। उन्होंने शेर पढ़ते हुए कहा—
“तुम्हारे साथ दोस्ताना पुराना था,
तुम इसमें रंग-ए-सियासत कहाँ से ले आए।”
जज़्बाती प्रेस कॉन्फ्रेंस में मेयर के तीखे तेवर
सोमवार को काशीपुर नगर निगम सभागार में अचानक बुलाई गई एक भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मेयर दीपक बाली ने अरविंद पाण्डेय पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि गदरपुर विधायक सुनियोजित तरीके से राजनीतिक गदर मचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वे अपने मंसूबों में सफल नहीं होंगे।
मेयर ने कहा कि अरविंद पाण्डेय का राजनीतिक कॅरियर लंबा और सम्मानजनक रहा है, उन्हें इसे दांव पर नहीं लगाना चाहिए था। “एक तरफ वे बीजेपी को अपनी राजनीतिक मां बताते हैं और दूसरी तरफ उसी मां का चीरहरण करने पर आमादा हैं,” — ऐसा कहते हुए दीपक बाली ने तीखी नाराज़गी जाहिर की।
“काशीपुर में घुसने नहीं दिया जाएगा”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मेयर दीपक बाली ने खुली चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अरविंद पाण्डेय इसी मंशा के साथ काशीपुर में प्रवेश करने की कोशिश करेंगे तो उन्हें काशीपुर में घुसने नहीं दिया जाएगा।
इतना ही नहीं, मेयर ने पार्टी के भीतर मौजूद एक कथित “कूटनीतिक गिरोह” का भी ज़िक्र किया और आरोप लगाया कि यह गिरोह बीजेपी को सत्ता से बाहर करने की साज़िश रच रहा है। उन्होंने हाईकमान से मांग की कि ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें पार्टी से निष्कासित किया जाए।
आग में घी डालने जैसा बयान?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि काशीपुर मेयर की इस प्रेस वार्ता ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को और हवा दे दी है। अरविंद पाण्डेय पर सीधे हमले के साथ-साथ पूर्व सांसद और वरिष्ठ बीजेपी नेता बलराज पासी को “पार्टी का धृतराष्ट्र” कहना तथा कुछ नेताओं को सियासी गिरोह बताना, हालात को और विस्फोटक बना सकता है।
फिलहाल यह साफ है कि बीजेपी के भीतर उठी यह आग कांग्रेस की देन नहीं, बल्कि पार्टी के अपने ही नेताओं के बयानों से भड़की है — और इसका असर आने वाले समय में राज्य की राजनीति पर गहरा पड़ सकता है।

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