उत्तराखंड में छठ महापर्व की आस्था और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। व्रतियों ने पूरे विधि-विधान के साथ अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। पर्व का उल्लास न सिर्फ मैदानी इलाकों में, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में भी देखने को मिला। देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश से लेकर कुमाऊं तक छठ पूजा पूरे श्रद्धा भाव और उल्लास के साथ मनाई गई। बीते दिन व्रतियों ने 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ किया था। आज छठ घाटों पर व्रती जल में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को सायंकालीन अर्घ्य अर्पित करते नजर आए। इस दौरान घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और चारों ओर ‘जय छठी मइया’ के जयकारे गूंज उठे। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर सूर्यास्त के बाद खरना का आयोजन किया गया, जिसके बाद आज अर्घ्य दिया गया। श्रद्धालु पारंपरिक गीतों जैसे “कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए” गाते हुए छठ घाटों की ओर बढ़े। मंगलवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ सूर्योपासना का यह पवित्र पर्व संपन्न होगा।

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