प्रदेशभर में प्रतिबंधित कफ सीरप के खिलाफ कार्रवाई, मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी
प्रदेश में बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की संयुक्त टीमों ने शनिवार को मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देश पर की गई।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने सभी डॉक्टरों से अपील की है कि वे दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंधित कफ सीरप न लिखें। यह अभियान हाल ही में राजस्थान और मध्य प्रदेश में कफ सीरप के सेवन से बच्चों की मौत के मामलों के बाद शुरू किया गया है। उत्तराखंड सरकार ने इसे एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या मानते हुए तत्काल प्रभाव से सख्त कदम उठाए हैं।
कौन-सी दवाएं हैं प्रतिबंधित?
केंद्र सरकार की एडवाइजरी के अनुसार:
- दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की खांसी या सर्दी-जुकाम की दवा नहीं दी जानी चाहिए।
- पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में भी इन दवाओं का सामान्य उपयोग अनुशंसित नहीं है।
- दवाओं का प्रयोग केवल विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह, निर्धारित खुराक और न्यूनतम समयावधि के लिए ही किया जाना चाहिए।
विशेष रूप से निम्न दवाएं प्रतिबंधित की गई हैं:
- डेक्स्ट्रोमेथोर्फन युक्त कफ सीरप
- क्लोरफेनिरामाइन मेलेट और फिनाइलेफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड के संयोजन वाली दवाएं (चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए)

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