बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज सोनपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राम सुंदर दास विधायक रहे चुके हैं बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़ी हमारी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज एक ऐसी सीट की बात जहां से जीते दो चेहरे राज्य के मुख्यमंत्री बने। एक ने यहां का विधायक रहते सत्ता संभाली तो दूसरे ने दस साल तक इस सीट का प्रतिनिधित्व करने के बाद राज्य की सत्ता संभाली। आज बात सोनपुर विधानसभा सीट की। इस सीट से जीत कर राम सुंदर दास बिहार के मुख्मंत्री बने थे। इसके बाद लालू प्रसाद यादव यहां से दस साल तक विधायक रहे। 2010 में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी सोनपुर सीट से चुनाव लड़ा। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

सारण जिले में आती है सोनपुर सीट
बिहार के 38 जिलों में से एक जिला सारण है। सारण जिला 3 अनुमंडल और 20 ब्लॉक में बंटा है। इस जिले में नौ विधासभा सीटें आती हैं। इनमें एकमा, मांझी, बनियापुर, तरैया, मढ़ौरा, छपरा, गरखा (एससी), अमनौर, परसा, सोनपुर शामिल हैं।आज सीट का समीकरण सीरीज में सोनपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। सोनपुर सीट पर 1952 में पहला चुनाव हुआ था।

1952: सोनपुर से कांग्रेस की मिली जीत
1952 के चुनाव में सोनपुर से कांग्रेस की जीत मिली। इस चुनाव में जगदीश शर्मा ने 1,243 वोट से जीत हासिल की। वहीं, दूसरे नंबर पर भाकपा के शियो बचन सिंह रहे। शर्मा को कुल 5,460 वोट मिले। वहीं, शियो बचन सिंह को 4,217 वोट मिले थे।

1957: निर्दलीय राम विनोद सिंह जीते
1957 के चुनाव में सोनपुर से निर्दलीय उम्मीदवार राम विनोद सिंह को जीत मिली। उन्होंने भाकपा के शियो बचन सिंह को मात्र 295 वोट से हराया। राम विनोद को 8,929 वोट मिले। वहीं, शियो बचन सिंह को 8,634 वोट मिले थे। इस चुनाव में कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही।
 

1962:  तीसरे प्रयास में जीते शियो बचन सिंह
पिछले दो चुनाव में हार का सामना कर चुके भाकपा के शियो बचन सिंह ने 1962 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के सुलगन प्रसाद यादव को मात्र 862 वोट से हराया। शियो बचन को 15,047 वोट मिले। वहीं सुलगन प्रसाद यादव को 14,185 वोट मिले थे।

      1967: 10 साल बाद कांग्रेस की वापसी

  • कांग्रेस ने 1967 के चुनाव में सोनपुर सीट पर 10 साल बाद वापसी की। कांग्रेस के राम जयपाल सिंह यादव ने जनसंघ के बीबी राय को 11,821 वोट से हराया। जयपाल को 26,636 और राय को 14,815 वोट मिले थे। 
  • 1969 के विधानसभा चुनाव में सोनपुर से कांग्रेस के राम जयपाल सिंह यादव ने भकापा के शियो बचन सिंह को 12,412 वोट से हराया। इस चुनाव में राम जयपाल को 29,331 वोट मिले थे। वहीं, शियो बचन को 16,919 वोट मिले थे।  
  • 1972 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राम जयपाल ने जीत की हैट्रिक लगाई। इस बार उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के राम सुंदर दास को 1,276 वोट से मात दी। राम जयपाल को कुल 34,832 वोट मिले। वहीं, दास को 33,556 वोट मिले थे। 
  • सोनपुर से विधायक रहते हुए राम जयपाल बिहार के उपमुख्यमंत्री बने। उनका कार्यकाल 3 जून 1971 से 9 जनवरी 1972 तक रहा। इसके बाद राम जयपाल 1981 से 1990 तक बख्तियारपुर सीट से भी विधायक रहे। 

1977: जनता पार्टी को मिली जीत 
आपातकाल के बाद हुए विधानसभा चुनाव में सोनपुर सीट से जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। जनता पार्टी के राम सुंदर दास ने निर्दलीय उम्मीदवार रामश्वेर प्रसाद राय को 25,336 वोट से हराया। राम सुंदर दास को 40,747 वोट मिले थे। वहीं रामश्वेर राय को मात्र 15,411 वोट मिले थे। सोनपुर से जीत हासिल करने वाले राम सुंदर दास इसके बाद बिहार के मुख्यमंत्री बने। हालांकि उनका कार्यकाल महज 10 महीने का ही रहा। 

1980: सोनपुर सीट से विधायक बने लालू यादव
1980 के विधानसभा चुनाव में सोनपुर सीट से लालू प्रसाद यादव जीते। लालू ने 10 साल तक सोनपुर सीट का प्रतिनिधित्व किया। 1980 का चुनाव उन्होंने जनता पार्टी सेक्युलर के टिकट पर लड़ा।  इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के जवाहर प्रसाद सिंह को 9,167 वोट से हराया। लालू यादव को कुल 45,041 वोट मिले। वहीं, जवाहर प्रसाद को 35,874 वोट से संतोष करना पड़ा। इस चुनाव में तत्कालीन विधायक और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तीसरे नंबर पर रहे। जनता पार्टी जेपी के टिकट पर उतरे दास को मात्र 10,396 वोट मिले थे। 

1985 के चुनाव में लालू यादव की जीत का अंतर और बढ़ गया। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के राज नारायण सिंह को 16,219 वोट से हराया। लालू यादव को कुल 34,401 वोट मिले थे। वहीं, राज नारायण को 18,182 वोट मिले थे।

1990: जनता दल के राज कुमार राय बने विधायक
1990 और 1995 में सोनपुर सीट से जनता दल के राज कुमार राय को जीत मिली। राजकुमार ने दोनों चुनाव में कांग्रेस के बीरेंद्र नारायण सिंह को हराया। 1990 के चुनाव में राजकुमार ने बीरेंद्र को 3,644 वोट से मात दी। वहीं, 1995 के चुनाव में राजकुमार ने बीरेंद्र को 18,013 वोट से हराया। इस चुनाव में राज कुमार को 38,966 वोट मिले थे और बीरेंद्र को 20,953 वोट मिले थे। 

 2000: सोनपुर में भाजपा ने खोला खाता
2000 के विधानसभा चुनाव में सोनपुर सीट से भाजपा को पहली जीत मिली। भाजपा के विनय कुमार सिंह ने राजद के डॉ. रामानुज प्रसाद यादव को 2,290 वोट से हराया। विनय कुमार को 72,502 वोट मिले थे। वहीं, रामानुज को 70,212 वोट मिले थे। 

2005: राजद के रामानुज बने सोनपुर के विधायक
बिहार में 2005 में दो बार चुनाव कराने पड़े थे। पहली बार फरवरी और दूसरी बार अक्तूबर में चुनाव हुए थे। दोनों ही चुनावों में यहां से राजद को ही जीत मिली थी और दोनों बार रामानुज विधायक बने। दोनों चुनाव में हारने वाले भाजपा के विनय सिंह थे। फरवरी चुनाव में रामानुज ने विनय को 10,551 वोट से मात दी थी। रामानुज को कुल 47,680 और विनय को 37,129 वोट मिले थे। वहीं, अक्तूबर के चुनाव में रामानुज ने विनय को 1,113 वोट से हराया था। इस चुनाव में उन्हें 44,139 वोट मिले थे। वहीं, विनय को 43,026 मिले थे।   

2010: राबड़ी देवी को मिला हार
पिछले दो चुनाव में हार का समाना कर चुके विनय सिंह ने 2010 के विधानसभा चुनाव में सोनपुर से जीत दर्ज की। उन्होंने राजद की राबड़ी देवी को 20,685 वोट से हराया था। विनय सिंह को कुल 64,676 वोट मिले थे। वहीं, राबड़ी देवी को 43,991 वोट मिले थे। 
 

2015: रामानुज की वापसी

2015 के चुनाव में रामानुज ने राजद की हार का बदला लेते हुए जीत दर्ज की। इस चुनाव में उन्होंंने तत्कालीन विधायक विनय को 36,396 वोट से हराया। रामानुज को 86,082 वोट मिले थे। वहीं, विनय को 49,686 वोट मिले थे।

2020 के चुनाव में भी रामानुज को ही जीत मिली। इस बार भी उन्होंने विनय सिंह को हराया। हार-जीत का अंतर 6,686 वोट का रहा। रामानुज को कुल 73,247 और विनय को 66,247 वोट मिले थे।

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By Mohd Nafees

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