पश्चिम एशिया में ईरान और इस्राइल के टकराव के बीच अमेरिकी सेना का ऑपरेशन मिडनाइट हैमर पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान के परमाणु ठिकानों को तबाह करने का दावा किया है। ईरान पर ताबड़तोड़ हवाई हमलों को इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अभूतपूर्व कार्रवाई बताया। ईरान की संसद में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने संबंधी प्रस्ताव पारित होने की खबर है। UNSC की आपात बैठक में पश्चिम एशिया के तनाव पर चिंता जताई गई। दोनों तरफ से जारी हमलों में अब तक 950 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव, वैश्विक ताकतों के अप्रत्याशित टकराव से जुड़ी हर अपडेट्स इस लाइव ब्लॉग में पढ़िए

इस्राइल ने ईरान पर किया हमला
इस्राइल ने एक बार फिर ईरान पर हमला किया है। दावा किया जा रहा है कि इस्राइल ने ईरान के छह सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। आईडीएफ ने कहा कि केरमानशाह क्षेत्र में 15 से अधिक लड़ाकू विमानों के साथ ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण स्थलों को निशाना बनाकर हमले किए।

बातचीत करने की जरूरत: अल्बानीज
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने अमेरिका के ईरानी परमाणु स्थलों पर हवाई हमले किए जाने के बाद क्षेत्र में किसी भी तरह की वृद्धि को रोकने के लिए बातचीत और कूटनीति का आह्वान किया। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने ईरान से बातचीत के लिए आगे आने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत की मेज पर नहीं आया, क्योंकि वह बार-बार अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करने में विफल रहा है। दुनिया लंबे समय से इस बात पर सहमत है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। और हम इसे रोकने के लिए कार्रवाई का समर्थन करते हैं। यही तो है। अमेरिकी कार्रवाई ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए केंद्रीय विशिष्ट स्थलों पर निर्देशित थी। हम वृद्धि और पूर्ण पैमाने पर युद्ध नहीं चाहते हैं। हम बातचीत और कूटनीति का आह्वान करना जारी रखते हैं। जैसा कि मैंने कई दिनों से कहा है, हम क्षेत्र में किसी भी तरह की वृद्धि को लेकर बहुत चिंतित हैं और हम कूटनीति, संवाद और तनाव में कमी देखना चाहते हैं। 

उन्होंने कहा कि हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने आने वाली चुनौती के बारे में स्पष्ट रहे हैं, जो किसी भी ईरानी परमाणु हथियार कार्यक्रम से उत्पन्न खतरे से निपट रहा है और क्षेत्रीय वृद्धि के जोखिम से निपट रहा है, और इसीलिए ऑस्ट्रेलिया ने ईरान से बातचीत की मेज पर आने और किसी भी परमाणु हथियार कार्यक्रम को छोड़ने का आह्वान किया। ईरान बातचीत की मेज पर नहीं आया क्योंकि वह बार-बार अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करने में विफल रहा है। हम ईरान से आग्रह करते हैं कि वह आगे कोई ऐसी कार्रवाई न करे जिससे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हो।

अमेरिका ने UNSC से की शांति वार्ता की अपील
अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से ईरान से इस्राइल को खत्म करने, परमाणु हथियार रखने के अपने प्रयास को रोकने, अमेरिकी नागरिकों और हितों को निशाना बनाना बंद करने और सद्भावना से शांति वार्ता करने का आग्रह करने का आह्वान किया है। यूएनएससी की बैठक में अमेरिकी राजदूत डोरोथी शीया ने ईरान में परमाणु सुविधाओं के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। यह अभियान वैश्विक असुरक्षा के एक लंबे समय से चले आ रहे लेकिन तेजी से बढ़ते स्रोत को समाप्त करने और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार इस्राइल को आत्मरक्षा के अपने अधिकार में मदद करने के लिए शुरू किया गया था। 40 साल ईरानी सरकार ‘अमेरिका की मौत’ और ‘इस्राइल की मौत’ का आह्वान करती रही है और अपने पड़ोसियों, संयुक्त राज्य अमेरिका और पूरी दुनिया की शांति और सुरक्षा के लिए लगातार खतरा बनी हुई है। उन्होंने ईरानी सरकार और उसके प्रॉक्सी पर इराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी सेवा सदस्यों सहित कई अमेरिकियों को मारने का आरोप लगाया। रूस के पूर्व राष्ट्रपति और राष्ट्रपति पुतिन के खास दिमित्री मेदवेदेव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर एक और युद्ध शुरू करने का आरोप लगाया। मेदवेदव ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि ‘ट्रंप शांतिदूत बनकर आए थे, लेकिन उन्होंने अमेरिका को एक नए युद्ध में झोंक दिया है।’ मेदवेदेव ने ये भी लिखा कि कई देश हैं, जो अपने परमाणु हथियार ईरान को देने के लिए तैयार हैं। हालांकि मेदवेदेव ने उन देशों का नाम नहीं लिया। ईरान ने कहा है कि अमेरिका ने उन पर हमला करके कूटनीति को तबाह करने का फैसला किया है और अब ईरानी सेना तय करेगी कि कब और कैसे जवाब देना है। ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत आमिर सईद इरवानी ने रविवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में कहा कि ईरान के परमाणु केंद्रों पर अमेरिकी हमले की आलोचना करते हुए ईरानी राजदूत ने कहा कि ‘हमने बार-बार युद्ध उन्मादी अमेरिका को चेतावनी दी थी कि वे इस दलदल में न फंसें। हालांकि अमेरिका ने ईरान पर हमला कर कूटनीति को तबाह करने का फैसला किया और अब ईरानी सेना तय करेगी कि कब और कैसे जवाब देना है। हम सभी जरूरी कदम उठाएंगे

ईरान के परमाणु ठिकानों को भारी नुकसान: ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान में सभी परमाणु स्थलों को भारी नुकसान हुआ है। जैसा कि उपग्रह चित्रों से पता चलता है। विनाश एक सटीक शब्द है। दिखाई गई सफेद संरचना चट्टान में गहराई से धंसी हुई है, यहां तक कि इसकी छत भी जमीन से काफी नीचे है और आग से पूरी तरह सुरक्षित है। सबसे ज्यादा नुकसान जमीन से काफी नीचे हुआ।

इस्राइली सेना का दावा- तेहरान में मिसाइल लांचर पर हमला किया; ईरान ने ड्रोन गिराने की बात कही
इस्राइली सेना के मुताबिक उसने पश्चिमी ईरान और तेहरान में लगातार हवाई हमले किए। ईरानी राजधानी के केंद्र में सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल लांचर पर भी हमला किया गया। लगभग 20 जेट विमानों ने 30 से अधिक गोला-बारूद की मदद से पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस्राइल ने दावा किया कि हमलों के दौरान करमानशाह और हमादान प्रांतों में मिसाइल भंडारण और प्रक्षेपण बुनियादी ढांचे, उपग्रह सुविधाओं और हवाई निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सैन्य रडार साइटों को भी निशाना बनाया गया। दूसरी तरफ ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB ने बताया कि मध्य ईरान के ऊपर इस्राइली हर्मीस 900 ड्रोन को मार गिराया गया।

मौजूदा परिस्थितियों में परमाणु अप्रसार संधि ध्वस्त होने का खतरा: IAEA प्रमुख
IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने पश्चिम एशिया के संवेदनशील हालात का हवाला देते हुए कहा है कि अमेरिकी हमलों के बाद परमाणु अप्रसार संधि (NPT) खतरे में है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परमाणु अप्रसार संधि खतरे में है। फिलहाल, IAEA सहित कोई भी एजेंसी ईरान के फोर्डो में भूमिगत नुकसान का आकलन नहीं कर सकता है। ग्रॉसी ने कहा, हमें लड़ाई को रोकने के लिए तुरंत और निर्णायक कार्रवाई कर अधिकतम संयम बरतना चाहिए। 

दुबई, रियाद के लिए एयर फ्रांस ने उड़ानें रद्द कीं
पश्चिम एशिया में ताबड़तोड़ हवाई हमलों के बीच विमानन कंपनी एयर फ्रांस केएलएम ने कहा कि उसने रविवार और सोमवार को दुबई और रियाद के लिए उड़ानें रद्द कर दी हैं। बता दें कि ईरान के परमाणु स्थलों पर अमेरिकी सेना के हमलों के बाद मध्य पूर्व की यात्रा पर संकट मंडराने लगा है।

आईएईए ने कहा- अमेरिकी हमले में ईरान के इस्फाहान साइट पर सुरंगों के प्रवेश द्वार प्रभावित
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था- अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के मुताबिक अमेरिकी सैन्य हमलों में ईरान के इस्फाहान परमाणु परिसर में सुरंगों के प्रवेश द्वार प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों ने 13 जून को ईरान के परमाणु केंद्रों पर इस्राइल द्वारा हमला करने से पहले कहा था कि ईरान के सबसे अधिक संवर्धित यूरेनियम का अधिकांश हिस्सा इस्फहान में भूमिगत रूप से संग्रहित किया गया था।

By Mohd Nafees

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