नैनीताल, जो अपनी खूबसूरती, सुकून और भाईचारे के लिए पहचाना जाता था, आज नफरत और गुंडागर्दी की आग में तप रहा है। मल्लीताल कोतवाली में तैनात एक ईमानदार पुलिस अधिकारी, सब-इंस्पेक्टर आसिफ खान, पर कुछ असामाजिक तत्वों ने न केवल हमला किया बल्कि वर्दी खींची, गालियाँ दीं और जान से मारने की धमकी दी। सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि उस वक्त वहाँ मौजूद अन्य पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे।

सवाल उठता है कि आसिफ खान का कसूर क्या था? क्या उनका मुस्लिम होना ही उन्हें निशाना बनाने का कारण बना? या फिर ये उस ड्यूटी का अंजाम था, जिसे वे ईमानदारी से निभा रहे थे? यह हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि उस वर्दी पर है जो देश की शान है, उस व्यवस्था पर है जिसमें आम जनता भरोसा करती है।

इस हमले ने नैनीताल की आत्मा को झकझोर दिया है, वह नैनीताल जहाँ हिंदू-मुस्लिम साथ रहते थे, त्योहार साथ मनाते थे। क्या अब वही गलियाँ नफरत में बँट जाएँगी? क्या अब हर मुसलमान पुलिसकर्मी को डर के साए में काम करना होगा?

आसिफ खान का परिवार आज सदमे में है, और पूरा समाज सवाल कर रहा है –
@UttarakhandPolice, @CMOfficeUttarakhand, @HMOIndia – क्या आप इस अन्याय के खिलाफ खड़े होंगे?
हमारी माँग है कि हमलावरों को तत्काल गिरफ़्तार किया जाए, और हर पुलिसकर्मी की सुरक्षा, धर्म से ऊपर उठकर, सुनिश्चित की जाए।
ये आवाज़ सिर्फ आसिफ खान के लिए नहीं, बल्कि हर उस भारतीय के लिए है जो इंसाफ, अमन और भाईचारे में यकीन रखता है।
अगर आज हम चुप रहे, तो कल ये आग हमारे घरों तक पहुँच सकती है।

By Mohd Nafees

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