काशीपुर। वैष्णव जन तो उनको कहिए जो पीर पराई जाणिए। जी हां, जब हम और आप अपनों के साथ भाई और बहन के रिश्तो का त्यौहार मना रहे थे तब उक्त पंक्तियां को साकार करते हुए डी- बाली ग्रुप की डायरेक्टर श्रीमती उर्वशी दत्त बाली एवं संजीवनी हॉस्पिटल के डायरेक्टर मुकेश चावला व मनीष चावला ने रामनगर के निकट ग्राम बसई पहुंच कर दिव्यांग बच्चों के साथ राखी का त्यौहार मनाकर हम सबके सामने एक नई मिसाल कायम की। यह बच्चे शरीर से तो लाचार हैं ही साथ ही अपनों के प्यार और दुलार से भी वंचित हैं। कहते हैं ऊपर वाला जो करता है सही करता है मगर यहां आकर विधि की विडंबना और उसका निष्ठुर रूप दोनों दिखाई देते हैं, क्योंकि इन बच्चों में कोई चल नहीं सकता तो कोई दौड़ नहीं सकता। किसी का कान काम नहीं करता तो किसी का दिमाग । ऐसे भी हैं जिनके दोनों हाथ और दोनों पैर खराब हैं मगर आंखों द्वारा देख कर यह महसूस करते हैं कि कोई आया है। त्योहारों या अन्य अवसरों पर कोई इनके पास आता है तो इन्हें उम्मीदों भरी खुशी होती है कि आज हमारे लिए कुछ अच्छा होगा। इन्हें पैसे नहीं प्यार की जरूरत है । अपनत्व और दुलार की जरूरत है । इनके हालात को देखकर मन में बरबस ही सवाल उठता है कि भंडारा हो तो यहां हो। भरी सर्दी में कंबल बंटे तो इन्हें दिए जाएं और दीपावली पर दीपक जलाए जाएं तो पहले इन बेचारों को भी मिठाई खिलाई जाए ।तब हम कह सकते हैं कि वास्तविक जरूरतमंदों व बेसहारों को मदद करने का हमारा असली प्रयास सार्थक हुआ। डी- बाली ग्रुप की डायरेक्टर श्रीमती उर्वशी दत्त बाली कहती हैं कि समाज के सभी लोगों को विभिन्न अवसरों पर इन दिव्यांग बच्चों के पास आना चाहिए । इनको अच्छा लगता है जब कोई इनके साथ त्यौहार सेलिब्रेट करता है। यह बेचारे अपने परिवार से दूर है लेकिन हमारे जाने पर इन्हें एक परिवार मिलता है, अतः त्योहार कोई भी हो थोड़ा टाइम निकाल कर हमें इनके साथ भी सेलिब्रेट करना चाहिए। कभी-कभी जरूरी नहीं कि हम पैसों से ही किसी की मदद करें, ऐसे बहुत से तरीके हैं जिनके द्वारा हम किसी को खुश रख सकते हैं। किसी की भावनाओं को बांट के अगर हम उसे सुख पहुंचा सकते हैं तो अपने आप में यह भी बहुत बड़ा उपकार है। इन बच्चों से बोला तो नहीं जाता लेकिन इनके मुस्कुराने और आंखों से पता लगता है कि हमारे आने पर यह कितने खुश होते हैं। हर किसी इंसान को भगवान किसी न किसी चीज से वंचित रखते हैं, लेकिन एक दूसरे के साथ मिलकर चलने पर पीड़ित इंसान अपनी खामियां भूल जाता है। इसीलिए तो कहा है कि किसी की मुस्कुराहटों पर हो निसार ,किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार, किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार -जीना इसी का नाम है। इस अवसर पर मनीष चावला ने अपनी बेटी का 12वां जन्मदिन भी इन दिव्यांग बच्चों के साथ मनाकर समाज के दूसरे लोगों के लिए एक प्रेरणा कायम की। इस कार्यक्रम में कृष्णा चावला, सोनिया चावला, अदिति चावला, दिव्यांशी चावला, विधि तनेजा एवं रामनगर के निकट ग्राम बसई स्थित जे एस आर इंदू समिति द्वारा संचालित इस दि जनेट शीड रोबर्टस रेजिडेंशियल (दिव्यांग बच्चों के स्कूल )के प्रधानाचार्य संदीप डाबर, शिक्षक आदि भी मौजूद रहे और बच्चों को राखी बांधने के बाद जन्मदिन का केक, मिठाई,और फल खिलाए गए जिसकी खुशी उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी।
दिव्यांग बच्चों के साथ मनाया राखी का त्यौहार
काशीपुर। वैष्णव जन तो उनको कहिए जो पीर पराई जाणिए। जी हां, जब हम और आप अपनों के साथ भाई और बहन के रिश्तो का त्यौहार मना रहे थे तब उक्त पंक्तियां को साकार करते हुए डी- बाली ग्रुप की डायरेक्टर श्रीमती उर्वशी दत्त बाली एवं संजीवनी हॉस्पिटल के डायरेक्टर मुकेश चावला व मनीष चावला ने रामनगर के निकट ग्राम बसई पहुंच कर दिव्यांग बच्चों के साथ राखी का त्यौहार मनाकर हम सबके सामने एक नई मिसाल कायम की। यह बच्चे शरीर से तो लाचार हैं ही साथ ही अपनों के प्यार और दुलार से भी वंचित हैं।
कहते हैं ऊपर वाला जो करता है सही करता है मगर यहां आकर विधि की विडंबना और उसका निष्ठुर रूप दोनों दिखाई देते हैं, क्योंकि इन बच्चों में कोई चल नहीं सकता तो कोई दौड़ नहीं सकता। किसी का कान काम नहीं करता तो किसी का दिमाग । ऐसे भी हैं जिनके दोनों हाथ और दोनों पैर खराब हैं मगर आंखों द्वारा देख कर यह महसूस करते हैं कि कोई आया है। त्योहारों या अन्य अवसरों पर कोई इनके पास आता है तो इन्हें उम्मीदों भरी खुशी होती है कि आज हमारे लिए कुछ अच्छा होगा। इन्हें पैसे नहीं प्यार की जरूरत है । अपनत्व और दुलार की जरूरत है । इनके हालात को देखकर मन में बरबस ही सवाल उठता है कि भंडारा हो तो यहां हो। भरी सर्दी में कंबल बंटे तो इन्हें दिए जाएं और दीपावली पर दीपक जलाए जाएं तो पहले इन बेचारों को भी मिठाई खिलाई जाए ।तब हम कह सकते हैं कि वास्तविक जरूरतमंदों व बेसहारों को मदद करने का हमारा असली प्रयास सार्थक हुआ। डी- बाली ग्रुप की डायरेक्टर श्रीमती उर्वशी दत्त बाली कहती हैं कि समाज के सभी लोगों को विभिन्न अवसरों पर इन दिव्यांग बच्चों के पास आना चाहिए । इनको अच्छा लगता है जब कोई इनके साथ त्यौहार सेलिब्रेट करता है। यह बेचारे अपने परिवार से दूर है लेकिन हमारे जाने पर इन्हें एक परिवार मिलता है, अतः त्योहार कोई भी हो थोड़ा टाइम निकाल कर हमें इनके साथ भी सेलिब्रेट करना चाहिए। कभी-कभी जरूरी नहीं कि हम पैसों से ही किसी की मदद करें, ऐसे बहुत से तरीके हैं जिनके द्वारा हम किसी को खुश रख सकते हैं। किसी की भावनाओं को बांट के अगर हम उसे सुख पहुंचा सकते हैं तो अपने आप में यह भी बहुत बड़ा उपकार है। इन बच्चों से बोला तो नहीं जाता लेकिन इनके मुस्कुराने और आंखों से पता लगता है कि हमारे आने पर यह कितने खुश होते हैं। हर किसी इंसान को भगवान किसी न किसी चीज से वंचित रखते हैं, लेकिन एक दूसरे के साथ मिलकर चलने पर पीड़ित इंसान अपनी खामियां भूल जाता है। इसीलिए तो कहा है कि किसी की मुस्कुराहटों पर हो निसार ,किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार, किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार -जीना इसी का नाम है। इस अवसर पर मनीष चावला ने अपनी बेटी का 12वां जन्मदिन भी इन दिव्यांग बच्चों के साथ मनाकर समाज के दूसरे लोगों के लिए एक प्रेरणा कायम की। इस कार्यक्रम में कृष्णा चावला, सोनिया चावला, अदिति चावला, दिव्यांशी चावला, विधि तनेजा एवं रामनगर के निकट ग्राम बसई स्थित जे एस आर इंदू समिति द्वारा संचालित इस दि जनेट शीड रोबर्टस रेजिडेंशियल (दिव्यांग बच्चों के स्कूल )के प्रधानाचार्य संदीप डाबर, शिक्षक आदि भी मौजूद रहे और बच्चों को राखी बांधने के बाद जन्मदिन का केक, मिठाई,और फल खिलाए गए जिसकी खुशी उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी।

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